पवित्रा एकादशी कल: ये है व्रत विधि, पुण्यफल और पारण समय



सावन मास के शुक्ल पक्ष की पवित्रा एकादशी पुत्रदा एवं पापनाशिनी एकादशी के नाम से प्रसिद्घ है। इस बार यह व्रत 3 अगस्त को किया जाएगा। इस व्रत को करने से पुत्र प्राप्ति की कामना पूर्ण होती है एवं व्रत के प्रभाव से मनुष्य के सभी पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इसी एकादशी से भगवान श्री श्री राधा गोबिंद जी की झूलन यात्रा भी शुरु हो जाती है। जो 7 अगस्त की पूर्णिमा तक चलेगी, इसलिए इस एकादशी का व्रत अधिक पुण्यकारी है।


कैसे करें पूजन:
प्रात: सूर्य निकलने से पूर्व उठकर स्नान करें और भगवान श्री केशव जी का तुलसी दल और तुलसी की मंजरियों के साथ ही धूप, दीप, नैवैद्य फल और फूलों से पूजन करना चाहिए। पूजन के पश्चात ब्राह्मण को यथा शक्ति दान और दक्षिणा देकर श्री हरिनाम संकीर्तन करें। एक समय फलाहार करने से व्रत सम्पन्न होता है। प्रात: व सांय तिल के तेल से दीपक जलाना चाहिए। द्वादशी के दिन नहां धोकर प्रभु का पूजन करने के उपरान्त ब्राह्मण को भोजन करवा कर स्वयं भोजन करना चाहिए। गाय को चारा खिलाएं तथा व्रत वीरवार को होने के कारण पीले रंग की वस्तुओं का दान करें।


व्रत का पुण्य फल:
वैसे तो किसी भी एकादशी के व्रत के प्रभाव से जीव की सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होतीं हैं परन्तु इस एकादशी व्रत के प्रभाव से मनुष्य के कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और पुत्र की प्राप्ति होती है। व्रत में जो भक्त भगवान श्री कृष्ण के सन्मुख दीपक जलाता है उसके पितर स्वर्ग लोग में स्थित होकर अमृत पान से तृप्त रहते हैं। दिन-रात दीप दान करने से मनुष्य को इतने पुण्य मिलते हैं कि उनकी संख्या चित्रगुप्त भी नहीं जानते।


क्या कहते हैं विद्वान- अमित चड्डा के अनुसार भक्ति के 64 अंग हैं, जिनमें एकादशी व्रत भी भक्ति का प्रमुख अंग है इसलिए सभी को एकादशी व्रत का पालन अवश्य करना चाहिए। गौडीय वैष्णव व्रत उत्सव निर्णय पत्रम के अनुसार व्रत का पारण 4 अगस्त को प्रात: 9.33 से पहले करना चाहिए। इसी दिन से चातुर्मास के दूसरे महीने का भी शुभारम्भ होगा।