नसीरूद्दीन शाह लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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क्या भारत के नेता धर्म की राजनीति करके आवाम को विकास के मुद्दों से भटका रही है ?

देश भर के कई राज्यों में इन दिनों चुनावी खुशबू की बयार बह रही है। जिसके चलते बयानबाजियों का मौसम काफी गरम बना हुआ है। राजनैतिक गलियारों में आरोप- प्रत्यारोप का दौर चालू है। देश की दोनों ही बड़ी पार्टियों के दिग्गज नेताओं की जुवानों से तीखे बोल निकल रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं है चुनावी माहौल बनते ही कई तरह के बयान शुरु हो जाते हैं। जनता इन पर खूब मनोरंजन भी करती है और तालियां भी बजाती है , मगर इस बार धर्म के मुद्दे विकास के मुद्दों को भटकाते नज़र आये ! कही राज्यों के नाम बदले जा रहे है , कही पर गाय के नाम पे लोगो की हत्या , कही पर नमाज़ पड़ने को लेकर विवाद, शबरीमला में लड़कियों के दर्शन को लेकर विवाद और इन सबसे आगे राम मंदिर पर निर्णय ! मगर क्या कोई न्यूज़ चैनल किसान के मुद्दों को उठाने को तैयार है ? क्या देश की जनता को भटकाने के लिए मीडिया का सहर लिया जा रहा है ? ये सब सोचने वाली बात है !

देश के उच्च स्तरीय नेताओं के बयान सुनकर पता लगाया जा सकता है कि चुनावी मेले में राजनेता किस कदर भाषा की मर्यादा खो बैठते हैं। कही हनुमान जी को कोई दलित बोलता है तो कोई जाट , ईश्वर को भी जाती विशेष से जोड़ने की तैयारी हो रही है ! भारतीय जनता पार्टी के विधायक सुरेन्द्र सिंह ने फिल्म अभिनेता नसीरूददीन शाह के भारतीय होने पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि शाह को पाकिस्तान चले जाना चाहिए. अपने बयानों के कारण अकसर विवादों के घेरे में रहने वाले सिंह ने कहा, 'शाह पाकिस्तान चले जाएं. 

बता दें, मशहूर अभिनेता नसीरूद्दीन शाह ने पिछले दिनों एक बयान में कहा था कि देश के हालात बहुत बुरे हैं और उन्हें इस पर गुस्सा आता है. उन्होंने कहा था कि हाल में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हुई हिंसा में साफ़ देखा गया कि आज देश में गाय की जान की कीमत एक पुलिस अफसर की जान से ज्यादा है. समाज में चारों तरफ जहर फैल चुका है और अब इसे से रोक पाना मुश्किल है. शाह के बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही है. इसके साथ ही शाह ने कहा था कि उन्हें अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर फिक्र होती है.!

आज प्रश्न उठता है कि देश में चुनावों के लिए प्रचार किए जा रहे हैं या अपनी जाति और गोत्र बताने की होड़ लगी हुई है। कोई भी नेता अपनी राजनेतिक सहूलियत के हिसाब से खुद को धर्म और जाति के आधार पर बांटने के लिए जोर देते रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी पर शुरु से ही हिंदुत्व की पार्टी होने का आरोप लगाया जाता रहा है। हालांकि चुनाव में हारने के बाद शायद कांग्रेस भी इसी अलाप पर निकल पड़ी है।