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शनिवार, 8 अप्रैल 2017

मंत्री माया सिंह ने अवैध कॉलोनियों के वैध होने का रास्ता साफ किया

 19 साल बाद प्रदेश की 2500 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों के वैध होने  की मंजूरी मिलेगी ।  मंत्री माया सिंह की इस पहल  को प्रदेश में सराहा जा रहा है ! प्रदेश सरकार ने नियमतिकरण के लिए कॉलोनी की विकास लागत में चार ब़डी छूट देने का प्रावधान किया है। अब कुल विकास लागत में न तो वाटर सप्लाई, सीवेज नेटवर्क और बिजली लाइनों को जा़ेडा जाएगा और न ही लोगों से इनके कनेक्शन के लिए भी कोई अतिरिक्त शुल्क वसूला जाएगा। इसके बाद बची विकास राशि में भी महज 20 प्रतिशत रकम लोगों को जमा करनी होगी। यदि सांसद या विधायक निधि मिल जाती है तो यह राशि और कम हो जाएगी।हालांकि यह कॉलोनियां 31 दिसंबर 2012 से पहले की होना चाहिए। सरकार ने नियमतिकरण के लिए तीन महीने की मियाद भी तय की है। 


नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मप्र नगरपालिक ([कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रेशन)] नियम 1998 में संशोधन प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर मंत्री माया सिंह के पास भेज दिया है। अब इसी हफ्ते नोटिफिकेशन जारी हो सकता है। इसके तहत कॉलोनी के ओपन स्पेस की दुगनी रकम लोगों की बजाय बिल्डर को जमा करनी होगी। इसमें कॉलोनाइजर्स को नई कॉलोनी बनाने के लिए भी ढाई लाख रपए तक का अनुमति शुल्क और 50 हजार रुपए रजिस्ट्रेशन शुल्क लेने का भी प्रावधान रखा गया है। 

कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन का वीडियो हुआ वायरल

भोपाल। शिवराज कैबिनेट  के मंत्री गौरीशंकर बिसेन अपनी वायरल हुई वीडियो से सुर्खियों में है ! उनके इस तथाकतित वीडियो ने सनसनी मचा दी है। उन्होंने इस वीडियो में कहा है कि सांसद निधि के दुरूपयोग मामले में वे फंस रहे थे,लेकिन तत्कालीन बालाघाट कलेक्टर गुलशन बामरा ने वह रिकॉर्ड जला दिया और वे बच निकले। यह मामला तब का है जब बिसेन सांसद थे। उन्होंने अपनी इस गड़बड़ी का खुलासा हाल में बालाघाट में किया है।



राजधानी में यह वीडियो क्लिप अब वाइरल है। जानकारी के मुताबिक बिसेन ने किरनापुर में बीती 26 मार्च को लोधी समाज द्वारा रानी अवंती बाई के प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में अपने अपराध को कबूल किया। बिसेन ने कहा कि मेरे रिश्तेदार नांगेलाल राहंगडाले ने मुझे और मेरी बेटी मौसम व पायल को सदस्य(ट्रस्ट)बनाया था। मैंने सांसद निधि से 25 लाख रूपया भी दे दिया था। मैंने कौन सा गुनाह किया था। लेकिन मेरे सगे भतीजे ने मेरे खिलाफ मोर्चा खोल दिया,वह तो भला हो कलेक्टर गुलशन बामरा का,जिन्होंने माचिस लगाकर वह रिकॉर्ड ही जला दिया,साक्ष्य मिटा दिया और मैं बच गया। ऊपर वाले ने बचा लिया। बिसेन के मुताबिक यह राशि पंवार-क्षत्रिय समाज के मंगल भवन के लिए दी गई थी।

जिस ट्रस्ट को राशि दी गई,उसमें बिसेन खुद तो संरक्षक थे,उनकी पत्नी कोषाध्यक्ष व बेटी सदस्य थीं। उस वक्त बिसेन बालाघाट से लोकसभा सदस्य थे।नियमों के मुताबिक सांसद निधि जिसे दी जाए,उससे सांसद की सीधा संबंध नहीं होना चाहिये। खास बात यह कि बिसेन के भतीजे व कांग्रेस नेता विशाल ने ही लगभग आठ साल पहले यह मामला उछालते हुए जिला प्रशासन व लोकायुक्त का दरवाजा खटखटाया था,लेकिन साक्ष्य के अभाव में बिसेन बच गये थे। अब अब बिसेन ने ही खुद पूरे घटनाक्रम की कलई खोल दी है।

माना जा रहा है कि विशाल अपने चाचा की स्वीकारोक्ति के बाद नया कदम उठाने की तैयारी में हैं। उधर, अब जबलपुर संभाग में कमिश्नर गुलशन बामरा ये कहकर पहले भी पल्ला झाड़ चुके है कि हमारा काम रिकॉर्ड को बचाने का होता है,जो बातें मंत्री ने कहीं हैं वे सही नहीं है। इस मामले पर चर्चा के लिए बिसेन से संपर्क नहीं हो सका,उनके स्टॉफ द्वारा बताया जाता रहा है कि वे छिंदवाड़ा में केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह के साथ व्यस्त हैं। मेरे क्षेत्र में कार्यक्रम था। मैं उसमें मौजूद थी, बिसेन ने सांसद निधि के गलत आवंटन और अफसर बामरा से रिकॉर्ड जलाने की बात कही थीं। ऐसा काम करना बिसेन की आदत में है। लेकिन मुख्यमंत्री कोई कार्रवाई करना ही नहीं चाहते लिहाजा हम तो बिसेन के खिलाफ जनता के बीच ही जा सकते हैं।

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