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Varalakshmi Vratam 2017 : मां लक्ष्मी की अपार कृपा पाने के लिए रखें ये व्रत



हिंदू धर्म में वरलक्ष्मी व्रत को बहुत ही पवित्र व्रत माना जाता है। इस साल यह व्रत 4 अगस्त को किया जाएगा। इस दिन महिलाएं अपने पति व परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं। शास्त्रों में धन, वैभव, सुख-संपत्ति और लक्ष्मी की प्राप्ती के लिए यह व्रत रखा जाता है। इस व्रत केवल शादीशुदा महिलाएं ही रखती हैं कुंवारी लड़कियों को यह व्रत करना मना होता है। वरलक्ष्मी व्रत रक्षाबंधन के ठीक पहले किया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि यह व्रत अगर पति-पत्नी दोनों साथ में रखते हैं तो इसका लाभ कई गुना बढ़ जाता है। इस व्रत को रखने से आर्थिक संकट दूर होते हैं और जीवन में धन का आगमन होता रहता है। इससे व्यक्ति के जीवन में धन, संपत्ति, ज्ञान, प्रेम आदि बना रहता है।


कौन रख सकता है 'वरलक्ष्मी-व्रत'
आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि इस व्रत को केवल शादीशुदा महिलाएं ही कर सकती है, इसका मतलब ये है कि कुवांरी लड़कियों के लिए व्रत रखना वर्जित है. अगर पत्नी के साथ उनके पति भी इस व्रत को रखा जाए तो इसका महत्व कई गुना तक बढ़ जाता है.

पवित्रा एकादशी कल: ये है व्रत विधि, पुण्यफल और पारण समय



सावन मास के शुक्ल पक्ष की पवित्रा एकादशी पुत्रदा एवं पापनाशिनी एकादशी के नाम से प्रसिद्घ है। इस बार यह व्रत 3 अगस्त को किया जाएगा। इस व्रत को करने से पुत्र प्राप्ति की कामना पूर्ण होती है एवं व्रत के प्रभाव से मनुष्य के सभी पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इसी एकादशी से भगवान श्री श्री राधा गोबिंद जी की झूलन यात्रा भी शुरु हो जाती है। जो 7 अगस्त की पूर्णिमा तक चलेगी, इसलिए इस एकादशी का व्रत अधिक पुण्यकारी है।


कैसे करें पूजन:
प्रात: सूर्य निकलने से पूर्व उठकर स्नान करें और भगवान श्री केशव जी का तुलसी दल और तुलसी की मंजरियों के साथ ही धूप, दीप, नैवैद्य फल और फूलों से पूजन करना चाहिए। पूजन के पश्चात ब्राह्मण को यथा शक्ति दान और दक्षिणा देकर श्री हरिनाम संकीर्तन करें। एक समय फलाहार करने से व्रत सम्पन्न होता है। प्रात: व सांय तिल के तेल से दीपक जलाना चाहिए। द्वादशी के दिन नहां धोकर प्रभु का पूजन करने के उपरान्त ब्राह्मण को भोजन करवा कर स्वयं भोजन करना चाहिए। गाय को चारा खिलाएं तथा व्रत वीरवार को होने के कारण पीले रंग की वस्तुओं का दान करें।


व्रत का पुण्य फल:
वैसे तो किसी भी एकादशी के व्रत के प्रभाव से जीव की सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होतीं हैं परन्तु इस एकादशी व्रत के प्रभाव से मनुष्य के कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और पुत्र की प्राप्ति होती है। व्रत में जो भक्त भगवान श्री कृष्ण के सन्मुख दीपक जलाता है उसके पितर स्वर्ग लोग में स्थित होकर अमृत पान से तृप्त रहते हैं। दिन-रात दीप दान करने से मनुष्य को इतने पुण्य मिलते हैं कि उनकी संख्या चित्रगुप्त भी नहीं जानते।


क्या कहते हैं विद्वान- अमित चड्डा के अनुसार भक्ति के 64 अंग हैं, जिनमें एकादशी व्रत भी भक्ति का प्रमुख अंग है इसलिए सभी को एकादशी व्रत का पालन अवश्य करना चाहिए। गौडीय वैष्णव व्रत उत्सव निर्णय पत्रम के अनुसार व्रत का पारण 4 अगस्त को प्रात: 9.33 से पहले करना चाहिए। इसी दिन से चातुर्मास के दूसरे महीने का भी शुभारम्भ होगा।

हरियाली अमावस्या जरूर रोपें पौधे, भूखों को कराएं भोजन



श्रावण मास वर्षा ऋतु का माह होता है। इस माह में मौसम का नजारा इतना मनोरम होता है कि बादलों की घटा में प्रकृति की छटा भी बिखरी हुई नजर आती है। हर ओर हरियाली छाने लगती है। पेड़ पौधे बारिश की बूंदों में धुलकर एकदम तरोताजा हो जाते हैं। पक्षी चहकने लगते हैं तो मन भी बहकने लगते हैं। इसीलिये सावन मास की अमावस्या बहुत खास मानी जाती है।अमावस्या पर स्नान, दान, श्राद्ध का विशेष महत्व है। इस दिन पितृों को प्रसन्न करने के लिए गाय के गोबर से बने उपले पर शुद्ध घी व गुड़ मिलाकर धूप देनी चाहिए। घर में जो भी ताजा भोजन बना हो, उससे भी धूप देने से पितृ प्रसन्न हो जाते हैं। सावन अमावस्या पर भूखे प्राणियों को भोजन कराने का विशेष महत्व है। इस दिन आटे की गोलियां मछलियों को खिलाने से परेशानियों का अंत होता है। चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं।

हरियाली अमावश को पीपल, बरगद, केला, नींबू, तुलसी आदि का पौधारोपण करना शुभ माना जाता है। इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती है। पीपल, बरगद, नीम, तुलसी, केला आदि में देवता का वास बताया गया है। इस दिन पीपल के मूल भाग में जल, दूध अर्पित करने से पितृ तृप्त होते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि एक पेड़ दस पुत्रों के समान होता है। अतः हरियाली अमावस्या के दिन एक पौधे का रोपण अवश्य करना चाहिए।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।