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शुक्रवार, 21 जून 2019

जानिये राशि के हिसाब से कौन से पौधे लगाने चाहिए ?


ज्योतिष के अनुसार भी राशि अनुसार पेड़-पौधे लगाने से बुरे ग्रहों का असर खत्म होता है। यही नहीं ज्योतिष तथा पर्यावरण का मेल करने के लिए हरियाली अमावस्या का पर्व भी मनाया जाता है।

बुधवार, 17 अप्रैल 2019

हनुमान जयंती पर अभिजित मुहूर्त में करें विशेष पूजन, होंगे कई लाभ

Hanuman Jayanti 2019: हनुमान जी का प्राकट्य चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को हुआ था. वहीं, कुछ लोग मानते हैं कि इनका अवतरण छोटी दीपावली को हुआ था. हनुमान जी के जन्मोत्सव पर हनुमान जी की विशेष पूजा उपासना करने का प्रावधान है. ऐसा करके हम अपने जीवन में आने वाली तमाम बाधाओं को दूर कर सकते हैं. इस दिन विशेष तरह के प्रयोगों से हम ग्रहों को भी शांत कर सकते हैं. शिक्षा, विवाह के मामले में सफलता, कर्ज और मुकदमे से मुक्ति के लिए यह दिन अति विशेष होता है. इस बार श्री हनुमान जी का जन्मोत्सव 19 अप्रैल को मनाया जाएगा.

गुरुवार, 11 अप्रैल 2019

Chhath Puja 2019: नहाय-खाय के साथ इस दिन शुरू होगी चैती छठ, जानें कब दिया जाएगा पहला अर्घ्य



सूर्य उपासना का महापर्व छठ हिन्दू नववर्ष के पहले महीने चैत्र के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व संतान, अरोग्‍य व मनोकामनाओं की पूर्ति के लिये रखा जाता है। इसको रखने से तन मन दोनों ही शुद्ध रहते हैं। इस व्रत को पूरे विश्‍वास और श्रद्धापूर्वक रखने से छठी माता अपने भक्‍तों पर कृपा बरसाती हैं और उनकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं।

शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

रवि प्रदोष व्रत आज: हमेशा निरोगी रखता है यह व्रत, शाम को इस तरह करें पूजा,

shiv parvati vivahआज रवि प्रदोष व्रत है। रविवार को आने वाला यह प्रदोष व्रत स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। इस व्रत से मनुष्य की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं तथा मनुष्य निरोगी हो जाता है। यह व्रत करने वाले समस्त पापों से मुक्त भी होते है।
रवि प्रदोष व्रत की पूजा का समय शाम 4.30 से शाम 7.00 बजे के बीच उत्तम रहता है इसलिए इस समय पूजा की जानी चाहिए।
ऐसे करें पूजा
नैवेद्य में जौ का सत्तू, घी एवं शकर का भोग लगाएं, तत्पश्चात आठों दिशाओं में 8‍ दीपक रखकर प्रत्येक की स्थापना कर उन्हें 8 बार नमस्कार करें। इसके बाद नंदीश्वर (बछड़े) को जल एवं दूर्वा खिलाकर स्पर्श करें। शिव-पार्वती एवं नंदकेश्वर की प्रार्थना करें।
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019

सरस्वती पूजा कल तैयारी अंतिम चरण में



विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा के पर्व बसंत पंचमी में गिनती के दिन ही शेष रह गए हैं। इसको लेकर शहर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस क्रम में कारीगर भी रात-दिन एक कर मां सरस्वती की प्रतिमाओं को तैयार करने में जुटे हुए हैं। जिले में कई स्थानों पर पंडाल सजाकर प्रतिमाओं को स्थापित कर विधिवत पूजन अर्चन किया जाता है।

इन सामग्री से करें पूजन

मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान से पूजन करें। पूजा के दौरान कलश, पान, सुपाड़ी, लौंग, इलायची, शृंगार सामग्री, सफेद व पीला वस्त्र, पीला सरसों फूल, आम का मंजर, अक्षत, पल्लव, चंदन, हल्दी, अबीर, घी, सफेद फूल आदि से प्रतिमा स्थापित करें। मां को बैर, गाजर, मिसरीकन, सफेद मिठाई, बतासे आदि का भोग लगाएं। दूध, घी, दही, मधु, शक्कर से पंचामृत बनाकर चढ़ाएं।

गुरुवार, 1 नवंबर 2018

धनतेरस 2018: सुख और समृद्धि के लिए धनतेरस पर जरूर खरीदें इनमें से कोई एक

अगर इस धनतेरस आप भी अपने पार्टनर को खुश करने के लिए उन्हें कोई गोल्ड ज्वेलरी गिफ्ट करने का प्लान बना रहे हैं तो जान लें ऐसा करना इन 4 राशि के लोगों को इस धनतेरस पर महंगा पड़ सकता है। धनतेरस के दिन लोग सोने-चांदी से बनी वस्तुएं खरीदने के साथ अपने घर में नई-नई चीजें खरीदकर लाते हैं। यह दिन खरीदारी के लिए बेहद शुभ माना जाता है। सोना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। बावजूद इसके इस धनतेरस इन राशियों के लोगों को सोना खरीदने से बचना चाहिए।सोने का संबंध बृहस्पति से होता है। सोना पहनना केवल आकर्षण और खूबसूरती का विषय नहीं है। इसे पहनने से पहले इसके शुभ और अशुभ प्रभावों को भी देखना बेहद जरूरी होता है। धनतेरस पर सोना खरीदने से पहले जान लें ये जरूरी बातें।मेष, कर्क, सिंह और धनु राशि वाले लोगों के लिए सोना खरीदना या उसे पहनना बहुत अच्छा होता है। इस राशि के लोग धनतेरस पर सोना खरीद सकते हैं।इस दिन सोना खरीदना उनके लिए फायदेमंद हो सकता है।

मंगलवार, 30 अक्तूबर 2018

Ahoi ashtami 2018: यहां पढ़ें अहोई अष्टमी व्रत की कथा



ये व्रत करवा चौथ से ठीक चार दिन बाद यानि कार्तिक मास की कृष्‍ण पक्ष अष्‍टमी को मनाया जाता है। अहोई अष्टमी का व्रत संतान की खुशहाली और समृद्धि के लिए किया जाता है। इस दिन मां अपने बच्चों की लंबी उम्र और उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती है। करवा चौथ की तरह ही ये व्रत भी खासतौर से उत्तर भारत में मनाया जाता है। यूपी, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश में ये व्रत खासतौर से रखा जाता है।

इस बार ये पर्व 31 अक्टूबर, 2018 यानि बुधवार को है। ज्योतिषीयों के अनुसार इस बार शनिवार दोपहर एक बजकर 11 मिनट पर सप्तमी समाप्त होगी और उसके बाद अष्टमी रहेगी। रविवार की दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगी।

शुक्रवार, 19 अक्तूबर 2018

इस गांव में की जाती है रावण की पूजा, मूर्ति के सामने घूंघट में आती हैं महिलाएं


पूरे देश में दशहरे पर रावण का दहन किया जाता है. इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, लेकिन मंदसौर के खानपुरा गांव में तो लोग रावण की पूजा करते हैं. इसकी वजह क्या है ये भी जान लीजिए.

इस गांव में नामदेव समाज की आबादी ज़्यादा है. समाज के लोग मानते हैं कि रावण की पत्नी मंदोदरी इसी गांव की थी. इस नाते रावण उनका दामाद हुआ और जमाई राजा को भला कोई मारता है. दामाद की तो पूजा की जाती है. बताते हैं कि बस इसी मान्यता के कारण इस गांव में 300 साल से ज़्यादा समय से रावण की पूजा होती आ रही है.

गांववालों ने अपने जमाई राजा रावण की इस खानपुरा गांव में भव्य मूर्ति स्थापित कर रखी है. दशहरे के दिन सुबह से लोगों का यहां पहुंचना शुरू हो जाता है. लोग हाथ में थाल और ढोल नगाड़े बजाते हुए मूर्ति स्थल तक पहुंचते हैं और पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं.

गांव की परंपरा के अनुसार महिलाएं अपने ससुर और ससुराल के मर्दों के सामने सिर ढंककर जाती हैं. दशानन क्योंकि इस गांव के दामाद थे इसलिए महिलाएं रावण की मूर्ति के सामने से घूंघट में निकलती हैं.

गांव वालों के मन में रावण के प्रति इतनी श्रद्धा है कि वे यह भी मानते हैं कि जिसे भी एकातारा बुख़ार यानी एक दिन छोड़कर बुख़ार आता है, वे अगर रावण के पैर में रक्षा सूत्र बांधे तो तबियत ठीक हो जाती है.लोग यहां आते हैं और रावण के पैरों में लच्छा जिसे लाल धागा कहते हैं वो बांधते हैं. इस श्रद्धा के पीछे एक भाव यह भी है कि रावण अहंकारी था तो क्या हुआ, वह प्रकांड विद्वान भी था.

शनिवार, 1 सितंबर 2018

Janmashtami 2018: जन्माष्टमी पर कान्हा की इन तस्वीरों के साथ भेजें शुभकामना संदेश

भगवान कृष्ण के जन्म दिवस को पूरी दुनिया जन्माष्टमी के पर्व के तौर पर मनाती है। इस दिन लोग वर्त करते हैं और जन्माष्टमी का उत्सव मनाते हैं। पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह में कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।  ज्योतिषियों के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत 2 सितंबर को मनाया जाएगा। तीन सितंबर को उदय काल में अष्टमी व रोहणी नक्षत्र वैष्णव की श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत मनाया जाएगा। कहा जाता है कि जो श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करते हैं, उनके 3 जन्मों का पाप का नाश होता है और कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करने वाले उपासक के लिए मोक्ष का मार्ग सुगम होता है। इस दिन भगवान का स्मरण और राधा-कृष्ण का नाम लेना भी अतिफलदायक होता है। ऐसे में सभी एक दूसरे को भगवान कृष्ण के जन्म दिवस के अवसर पर शुभकामना संदेश देते हैं।  तो इस जन्माष्टमी मनाइए कान्हा का जन्मदिन और भेजें से तस्वीरें जो आपका मन मोह लेंगी। 

सोमवार, 27 अगस्त 2018

आ रही है जन्माष्टमी, मथुरा-वृंदावन के इन मंदिरों से है श्रीकृष्ण का नाता

भ्रादपद की रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इस बार कृष्ण जन्माष्टमी 2 सितंबर यानी रविवार को है। मथुरा-वृंदावन के बारे में कहा जाता है कि यहां कहीं से भी एक पत्थर उछालो तो वो किसी ना किसी मंदिर पर ही गिरता है। इसलिए इस धाम को मंदिरों की नगरी भी कहा जाता है, साथ ही यहां हर मंदिर का भगवान कृष्ण से नाता भी है। जन्माष्टमी के मौके पर आज हम आपको बताते हैं कि मथुरा-वृंदावन के इन मंदिरों से भगवान कृष्ण का क्या नाता है…जैसा की आपको नाम से ही पता चल रहा है कि भगवान कृष्ण का यहां कारागार में जन्म हुआ था। कृष्ण जन्मभूमि की जन्माष्टमी विश्व प्रसिद्ध है। यह मंदिर मथुरा के बीचों-बीच स्थित है।मथुरा के राजा द्वारकाधीश मंदिर का निर्माण 1814 में किया गया था। यहां आपको भगवान कृष्ण और इनसे जुड़ी घटनाएं कलाकृतियों के द्वारा बखान करती हुई मिलेंगी। जन्माष्टमी के दौरान यहां बहुत भीड़ होती है। मथुरा में जन्मभूमि के बाद द्वारकाधीश के मंदिर की सबसे ज्यादा पूजा होती है।रहस्यों से भरा हुआ निधिवन। मान्यता है कि यहां आज भी कान्हा गोपियों के साथ रास रचाने आते हैं। शाम होते ही मंदिर में विशेष तैयारियां की जाती हैं। सभी घरों की खिड़की दरवाजे तक बंद हो जाते हैं। यहां तक की पंक्षी और जानवर भी शाम को इस वन से चले जाते हैं।वृंदावन का मशहूर मंदिर श्रीबांके बिहारी मंदिर। इस मंदिर के बिना वृंदावन की यात्रा पूरी नहीं होती है। यहां होने वाले अलग-अलग तरह के श्रृंगार की वजह देश-विदेश से कई भक्त दर्शन करने आते हैं। जन्माष्टमी के एक सप्ताह पहले से ही मंदिर में तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो जाती है।

सोमवार, 30 अप्रैल 2018

शबे-बरात एक मई को



शाबान अरबी कैलेंडर का आठवां महीना है। यह रमजान की तैयारी का महीना है। इस माह में एक रात है शबे-बरात, जो गुनाहों से माफी और इनाम की रात है। शबे-बरात रात मंगलवार को मनाई जाएगी। इसके दो सप्ताह बाद रमजान का आगाज हो जाएगा।


शबे-बरात की आमद को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। कब्रिस्तान में साफ-सफाई और रोशनी का इंतजाम किया जा रहा है। दरगाहों पर भी खास इंतजाम किए गए हैं। इस रात में लोग कब्रिस्तान जाकर अपने अजीजों के लिए दुआएं मांगते हैं। रात भर जागकर मस्जिदों में इबादत करते हैं। जामा मस्जिद के पेश इमाम मुफ्ती शाहिद अजहरी ने बताया कि शाबान की 15वीं रात खुदा का एक बेशकीमती इनाम है। इसमें मोमिनों के गुनाह माफ कर दिए जाते हैं और दुआएं कुबूल होती हैं। इस रात की फजीलत को समझते हुए ज्यादा से ज्यादा वक्त इबादत में गुजारें। बुरी बातों से बचें। इस रात को सैर और तफरीह में न गुजारें। अपने अजीजों के लिए दुआएं करें। मुल्क की तरक्की और अमन के लिए भी दुआ करें।

बुधवार, 24 जनवरी 2018

भीष्म अष्टमी 2018: भीष्म पितामह के लिए किया जाता है व्रत, जानें क्या है इस दिन का महत्व



हिंदू पंचाग के अनुसार माघ माह की शुक्ल पक्ष अष्टमी को भीमाष्टमी के रुप में मनाया जाता है। इस दिन महाभारत के मुख्य किरदार भीष्म पितामाह ने अपने शरीर को छोड़ा था, इसी कारण से इस दिन को निर्वाण दिवस के रुप में मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन विधि के अनुसार व्रत किया जाता है। व्रत करने वाली महिला को बलशाली पुत्र की प्राप्ति होती है। इसी के साथ व्रत करने वाले श्रद्धालु को भीष्म पितामह की आत्मा को सुकून देने के लिए इस दिन तर्पण करना चाहिए।

मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि भीष्म अष्टमी का व्रत करने वाले के जाने-अनजाने में किए हुए पाप नष्ट हो जाते हैं और साथ ही पितृदोष से मुक्ति और पितरों को शांति मिलती है। महाभारत की कथा के अनुसार मान्यता है कि इस दिन अपनी इच्छा से इस दिन शरीर त्याग किया था। भीष्म पितामह के निमित्त जो श्रद्धालु तिल, जल के साथ श्राद्ध, तर्पण करता है और जरुरतमंद लोगों को दान करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

शनिवार, 2 दिसंबर 2017

दो दिवसीय माता अनसूया मेला शुरू, 225 निसंतान दंपति करेंगे संतान प्राप्ति की कामना

गोपेश्वर। देवी भक्तों के जयकारों के बीच शक्ति शिरोमणि पुत्रदायिनी माता अनसूया मेला शुरू हो गया है। शनिवार को 225 बरोही (निसंतान दंपति) देव डोलियों के साथ अनसूया मंदिर पहुंचे। मेला शुभारंभ पर अलग-अलग गांवों से अनसूया गेट पर पहुंची देव डोलियों के अद्भुत मिलन से संपूर्ण मंडल घाटी भक्तिमय हो उठी। देर शाम तक निसंतान दंपतियों का अनसूया मंदिर पहुंचने का सिलसिला जारी था।
अनसूया गेट पर बदरीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट ने दो दिवसीय अनसूया मेले का शुभारंभ किया। अपराह्न तीन बजे सबसे पहले कठूड़ गांव की मां ज्वाला की डोली मंडल बाजार में पहुंची। इसके बाद ग्राम पंचायत खल्ला, बणद्वारा, देवलधार और सगर गांवों से भी ज्वाला मां की डोलियां अनसूया गेट पर पहुंचीं। यहां देव डोलियों ने भक्तों को दर्शन दिए। करीब आधा घंटे तक आचार्य ब्राह्मणों ने सभी देव डोलियों की एक स्थान पर पूजा की। शाम चार बजे देव डोलियों ने अनसूया माता मंदिर के लिए प्रस्थान किया। मान्यता है कि अपनी बहन अनसूया को मिलने के लिए क्षेत्र की मां ज्वाला दत्तात्रेय जयंती पर अनसूया मंदिर पहुंचती हैं। इस दौरान महिलाओं ने मांगल गीतों से मां अनसूया का आह्वान किया। बदरीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट ने कहा कि अनसूया मेले के संरक्षण के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा। उन्होंने विधायक निधि से अनसूया मंदिर में यात्री विश्राम गृह के लिए पांच लाख रुपये और जीआईसी बैरांगना में कंप्यूटर क्रय के लिए दो लाख रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने अनसूया मंदिर तक चार किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए शासन से जल्द मंजूरी दिलाने का आश्वासन लोगों को दिया। देर शाम 225 बरोही (निसंतान दंपति) संतान प्राप्ति के लिए अनसूया मंदिर प्रांगण के एक कक्ष में पूजा के लिए बैठ गए। मान्यता है कि उन्हें सपने में माता अलग-अलग रूपों में दर्शन देती हैं, जिस बरोही को माता दर्शन दे देती हैं, वह चुपके से उठकर मुख्य मंदिर में पूजा के लिए पहुंच जाती है। जिस भी बरोही के स्वप्न में कन्या आएगी, तो उसे शुभ माना जाता है। अनसूया मंदिर के पुजारी डा. प्रदीप सेमवाल ने बताया कि गुजरात, मुंबई के साथ ही मैदानी क्षेत्रों से कई देवी भक्त माता अनसूया के दर्शनों को पहुंचे हैं। इस मौके पर अनसूया मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष बीएस झिंक्वाण, पूर्व अध्यक्ष कुंवर सिंह नेगी, पूर्व ब्लॉक प्रमुख भगत सिंह बिष्ट आदि मौजूद थे।

मंगलवार, 17 अक्तूबर 2017

नरक चतुर्दशी 2017 पूजन विधि: जानिए क्या है नरकचतुर्दशी और क्यों मनाया जाता है इसे दिवाली से एक दिन पहले



धनतरेस के अगले दिन यानि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को को नरक चतुर्दशी के रुप में जाना जाता है। इस दिन को कृष्ण चतुर्दशी, छोटी दिवाली, रुप चतुर्दशी, यमराज निमित्य दीपदीन के रुप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर को क्रूर कर्म करने से रोका। उन्होनें 16 हजार कन्याओं को उस दुष्ट की कैद से छुड़ाकर अपनी शरण दी और नरकासुर को यमपुरी पहुंचाया। नकरासुर वासनाओं के समूह और अहंकार का प्रतीक है। इसके बाद छुड़ाई हुई कन्याओं को सामाजिक मान्यता दिलवाने के लिए सभी को अपनी पत्नी के रुप में स्वीकार किया। इस तरह से नरकासुर से सभी को मुक्ति मिली और इस दिन से इसे नरकाचतुर्दशी के रुप में छोटी दिवाली मनाई जाने लगी। नरकचतुर्दशी दिवाली के पांच दिनों के त्योहार में से दूसरे दिन का त्योहार है। इस दिन के लिए मान्यता है कि इस दिन पूजा करने वाले को नरक से मुक्ति मिलती है।



नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली के साथ इस दिन को रुप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन के लिए एक मान्यता ये है कि एक हिरण्यगभ नामक एक राजा थे, उन्होनें राज पाठ छोड़कर अपना जीवन तर में व्यतीत करने का निर्णय लिया। उन्होनें कई वर्षों तक इतनी कठिन तपस्या करी कि उनके शरीर पर कीडे़ पड़ गए और उनका शरीर सड़ने लगा। हिरण्यगभ को इस बात का बहुत दुख हुआ कि उन्होनें अपनी व्यथा नारद मुनि से कही। इसके बाद नारद मुनि ने कहा कि योग साधना के दौरान आप अपने शरीर की स्थिति सही नहीं रखते हैं इसी के कारण आपका शरीर सड़ गया है। हिरण्यगभ ने इसका निवारण पूछा तो नारद मुनि ने बताया कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन शरीर पर लेप लगा कर सूर्योदय से पूर्व स्नान करें और उसके साथ ही रुप के देवता श्री कृष्ण की पूजा करनी चाहिए। इसलिए इस दिन को रुप चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है।

छोटी दिवाली पर यम का दीया जलाने से पाप मुक्ति



दिवालीसे एक दिन पहले छोटी दिवाली के दिन यम का दीया जलाने से पाप मुक्ति मिलती है और इस दिन मुख्य रूप से यमराज की पूजा का विधान होता है। यह जानकारी ज्योतिषाचार्य पंडित राम सेवक पंडित घनश्याम पांडेय ने दी। उन्होंने बताया कि छोटी दीवाली के दिन मिट्टी के दीया में सरसों का तेल डालकर घर के बाहर किसी ऊंचे स्थान पर रखे और दीया की लौ दक्षिण दिशा में ही हो। दक्षिण दिशा में दिया इसलिए जलाया जाता है क्योंकि इस दिशा के स्वामी यमराज हैं और इस दिन यमराज की पूजा से पाप से मुक्ति मिलने की मान्यता है। इसलिए उस दिन से ही यमराज को दीए जलाने की प्रथा चली रही है।

सोमवार, 16 अक्तूबर 2017

Dhanteras Special: जानिए राशि के हिसाब से क्या खरीदना है शुभ

दिवाली से पहले लोग सुख समृद्धि के लिए धनतेरस के दिन कई चीजें खरीदते है और दिवाली के दिन पूजा करते है। आज हम आपको बताएंगे कि राशि के हिसाब से कौन सी चीज खरीदना आपके लिए फायदेमंद होगा। आइए जानते है धनतेरस के दिन किन राशि के लोगों को क्या खरीदना चाहिए।
 
1. मेष राशि
मेष राशि के लोगों को धनतेरस पर लोहें, चांदी, सोना और बर्तन खरीदना चाहिए। इस दिन केमिकल वाली चीजें खरादने से आपको नुकसान हो सकता है।
2. वृषभ राशि
इस राशि के लोगों को इस दिन सोना, चांदी, पीतल और कांसे से बनी चीजें खरीदना चाहिए।
3. मिथुन राशि
इस राशि के लोगों को इस दिन प्लाट, जमीन और घर खरीदा चाहिए। इसके अलावा आप पुखराज सोना भी निश्चित होकर खरीद सकते है।
4. कर्क राशि
इस दिन कर्क राशि के लिए सफेद वस्तु, चांदी, इलेक्ट्रॉनिक और नए वाहन खरादना अच्छा रहेंगा।
5. सिंह राशि
इस राशि के लोग जो भी खरीदे उसे अपने नाम पर ना लें। इससे आपकी बस्तु ज्यादा देर तक नहीं टिकेगी।
6. कन्या राशि
नए वस्त्रों को छोड़ कर चांदी, इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन और फर्नीचर खरीदना आपके लिए लाभदायक होगा।
7. तुला राशि
इस राशि के लोग चांदी, सोने और कांसे से बनी चीजें खराद सकते है।
8. वृश्चिक राशि
इस राशि पर बुरा प्रभाव होने के कारण सिर्फ चांदी, बर्तन और पीतल की वस्तुएं ही खरीद सकते है।
9. धनु राशि
इस दिन आप पीले कपड़े, दवाई, सोना, गेहूं आदि खरीद सकते हैं।
10. मकर राशि
इस राशि के लोगों को इस दिन वस्त्र दान करने से फायदा होगा। इसके अलावा आप इस दिन प्राप्टी खरीद सकते है।
11. कुंभ राशि
इस दिन आपको किसी भी चीज में निवेश करने से धन का फायदा होगा। इस दिन आप सोना व किमती पत्थर न खरीदें।
12. मीन राशि
इस दिन निजी प्राप्टी और सोना खरीदना आपके लिए अच्छा होगा। इस दिन भूलकर भी आप किसी को पैसे उधार न दें।

बुधवार, 13 सितंबर 2017

महालक्ष्मी व्रत आज: इन 5 उपायों को करने से दूर होगी दरिद्रता, पूरी होगी हर मनोकामना 

आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को महालक्ष्मी का व्रत किया जाता है। इस बार ये व्रत 13 सितंबर यानि बुधवार को है। 16 दिनों तक चलने वाला यह महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद के शुक्लपक्ष की अष्टमी को प्रारम्भ होता है और आश्विन मास कृष्णपक्ष की अष्टमी की तिथि तक चलता है। इस व्रत को करने से मां लक्ष्मी सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती है।महालक्ष्मी व्रत में मां लक्ष्मी के हाथी पर बैठी हुई मूर्ति को लाल कपड़ा के साथ विधि-विधान के साथ इनकी स्थापना करें और पूजा कर ध्यान लगाएं।

महालक्ष्मी व्रत के दिन श्रीयंत्र या महालक्ष्मी यंत्र को मां लक्ष्मी के सामने स्थापित करें और इसकी पूजा करें। यह चमत्कारी यंत्र धन वृद्धि के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। इस यंत्र की पूजा से परेशानियां और दरिद्रता दूर होती है।

महालक्ष्मी व्रत में दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल और दूध डालकर देवी लक्ष्मी की मूर्ति से अभिषेक करना चाहिए इससे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

माता लक्ष्मी को कमल का फूल बहुत पसंद होता है इसलिए लक्ष्मीजी की पूजा में यह फूल अवश्य चढ़ाना चाहिए।

गुरुवार, 3 अगस्त 2017

Varalakshmi Vratam 2017 : मां लक्ष्मी की अपार कृपा पाने के लिए रखें ये व्रत



हिंदू धर्म में वरलक्ष्मी व्रत को बहुत ही पवित्र व्रत माना जाता है। इस साल यह व्रत 4 अगस्त को किया जाएगा। इस दिन महिलाएं अपने पति व परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं। शास्त्रों में धन, वैभव, सुख-संपत्ति और लक्ष्मी की प्राप्ती के लिए यह व्रत रखा जाता है। इस व्रत केवल शादीशुदा महिलाएं ही रखती हैं कुंवारी लड़कियों को यह व्रत करना मना होता है। वरलक्ष्मी व्रत रक्षाबंधन के ठीक पहले किया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि यह व्रत अगर पति-पत्नी दोनों साथ में रखते हैं तो इसका लाभ कई गुना बढ़ जाता है। इस व्रत को रखने से आर्थिक संकट दूर होते हैं और जीवन में धन का आगमन होता रहता है। इससे व्यक्ति के जीवन में धन, संपत्ति, ज्ञान, प्रेम आदि बना रहता है।


कौन रख सकता है 'वरलक्ष्मी-व्रत'
आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि इस व्रत को केवल शादीशुदा महिलाएं ही कर सकती है, इसका मतलब ये है कि कुवांरी लड़कियों के लिए व्रत रखना वर्जित है. अगर पत्नी के साथ उनके पति भी इस व्रत को रखा जाए तो इसका महत्व कई गुना तक बढ़ जाता है.

शनिवार, 22 जुलाई 2017

हरियाली अमावस्या जरूर रोपें पौधे, भूखों को कराएं भोजन



श्रावण मास वर्षा ऋतु का माह होता है। इस माह में मौसम का नजारा इतना मनोरम होता है कि बादलों की घटा में प्रकृति की छटा भी बिखरी हुई नजर आती है। हर ओर हरियाली छाने लगती है। पेड़ पौधे बारिश की बूंदों में धुलकर एकदम तरोताजा हो जाते हैं। पक्षी चहकने लगते हैं तो मन भी बहकने लगते हैं। इसीलिये सावन मास की अमावस्या बहुत खास मानी जाती है।अमावस्या पर स्नान, दान, श्राद्ध का विशेष महत्व है। इस दिन पितृों को प्रसन्न करने के लिए गाय के गोबर से बने उपले पर शुद्ध घी व गुड़ मिलाकर धूप देनी चाहिए। घर में जो भी ताजा भोजन बना हो, उससे भी धूप देने से पितृ प्रसन्न हो जाते हैं। सावन अमावस्या पर भूखे प्राणियों को भोजन कराने का विशेष महत्व है। इस दिन आटे की गोलियां मछलियों को खिलाने से परेशानियों का अंत होता है। चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं।

हरियाली अमावश को पीपल, बरगद, केला, नींबू, तुलसी आदि का पौधारोपण करना शुभ माना जाता है। इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती है। पीपल, बरगद, नीम, तुलसी, केला आदि में देवता का वास बताया गया है। इस दिन पीपल के मूल भाग में जल, दूध अर्पित करने से पितृ तृप्त होते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि एक पेड़ दस पुत्रों के समान होता है। अतः हरियाली अमावस्या के दिन एक पौधे का रोपण अवश्य करना चाहिए।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

शनिवार, 8 अप्रैल 2017

ज्योतिष डाटा बैंक बनाने वाला मप्र पहला राज्य



भोपाल। मप्र की जेलों में कुछ महीने बाद ज्योतिष के छात्र लैपटॉप लिए बंदियों की कुंडली बनाते हुए नजर आएंगे। दरअसल राजधानी में महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान ज्योतिषी में डिप्लोमा कोर्स शुरू कर रहा है जिसके सिलेबस में छात्रों को कैदियों के पास भी भेजा जाएगा, जिससे वो उनकी कुंडली तैयार कर पता कर पाएं कि किस विशेष ग्रह दशा में वे अपराध के लिए प्रेरित हुए।

अध्ययन का ये दायरा सिर्फ जेलों तक ही सीमित नहीं होगा, बल्कि आईआईएम जैसे बड़े संस्थानों में भी अध्ययन कराया जाएगा। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य भविष्य के लिए एक ऐसा डाटा बैंक बनाने का है जिसके इस्तेमाल से नौजवानों को अपराध की राह में जाने से पहले ज्योतिष विद्या के जरिये सचेत किया जा सके। इस तरह का डाटा बैंक बनाने वाला मप्र पहला राज्य होगा।

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