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गुरुवार, 18 अक्तूबर 2018

मीटू: अकबर द्वारा मानहानि के केस की सुनवाई 31 तक टली

नई दिल्ली मीटू के आरोपों से घिरे पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर द्वारा पत्रकार प्रिया रमानी पर मानहानि का मुकदमें की सुनवाई गुरुवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में हुई। मामले की सुनवाई कर रहे जज समर विशाल ने कहा कि पहले मानहानि करने वाले ट्वीट/स्टेटमेंट को देखते हैं। यदि यह सामग्री मानहानि पहुंचाने वाली पाई गई तो इसे आगे ले जाया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि 31 अक्टूबर को शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे।

अकबर की तरफ से पेश हुई वकील गीता लूथरा ने कहा, 'प्रिया रमानी ने शिकायतकर्ता की मानहानि करने वले ट्वीट किए हैं। उनका दूसरा ट्वीट साफ तौर पर मानहानि करने वाला है, जिसे 1200 लोगों ने लाइक किया।' लूथरा ने कहा कि उनके क्लाइंट दोषी नहीं थे, इसके बावजूद उन्होंने पद से हटने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि रमानी के आरोपों से मेरे क्लाइंट की 40 साल से कमाए गए सम्मान को ठेस पहुंची है। जज समर विशाल ने कहा कि 31 अक्टूबर को शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। जज ने कहा, 'मैंने शिकायत और इससे जुड़े दस्तावेज देखे। मैं आईपीसी की धारा 500 के तहत अपराध की संज्ञान लेता हूं।' बता दें कि महिला पत्रकार प्रिया रमानी ने 7 अक्टूबर को 1 साल पहले एक पत्रिका में टॉप एडिटर के व्यवहार के बारे में लिखा था, बाद में साफ हुआ कि आरोप केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर के बारे में थे। रमानी ने लिखा था कि अकबर ने कथित तौर पर उन्हें एक होटल के रूम में जॉब इंटरव्यू के लिए बुलाया, जो इंटरव्यू कम और डेट ज्यादा थी। उन्होंने लिखा कि अकबर ने उन्हें हिंदी गाने सुनाए और उनके करीब बैठने को कहा। कई अन्य महिलाओं ने अकबर पर उनके खराब व्यवहार के बारे में आरोप लगाए, जब वह मीडिया संस्थान में उनके बॉस थे। इनमें शुमा राय, शुतापा पॉल, रुथ डेविड, कनिका गहलौत शामिल थीं। अपने ऊपर लगातार लग रहे आरोपों की वजह से अकबर को बुधवार को केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री पद से इस्तीफा भी देना पड़ा। गौरतलब है कि एशियन ऐज में काम करने वाले पूर्व पत्रकार अक्षय मुकुल, रशीद किदवई, कमलेश सिंह समेत कुछ अन्य ने पीड़ितों के समर्थन में खड़े हुए। इसके अलावा अन्य कुछ शीर्ष पत्रकारों ने रमानी को अकबर के खिलाफ इस कानूनी मामले को लड़ने के लिए आर्थिक मदद करने का भी आश्वासन दिया।

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