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Sadhvi Pragya : दिग्विजय सिंह के खिलाफ साध्वी प्रज्ञा को मैदान में उतार सकती है बीजेपी

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ बीजेपी भोपाल से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को चुनाव लड़ा सकती है. पार्टी प्रज्ञा के नाम को लेकर नफा-नुकसान के बारे में सोच रही है. वहीं ऐसा होता है तो भोपाल सीट पर वोटों का ध्रुवीकरण देखने मिल सकता है. भोपाल से दिग्विजय सिंह का नाम आने के बाद से ही बीजेपी प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर विचार कर रही है. भोपाल से पार्टी पिछले 30 सालों से चुनाव जीतती आ रही है. दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक लगातार 10 सालों तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. 2003 में मिली हार के बाद 16 सालों से दिग्विजय सिंह कोई भी चुनाव नहीं लड़े हैं. वहीं इस चुनाव को दिग्विजय सिंह पार्टी का चुनाव बताकर मैदान में उतरे हैं, दिग्विजय का कहना है कि बीजेपी किसी को भी उतारे इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता!

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर मालेगांव धमाके के बाद मीडिया में आयी थी !  बॉम्बे हाई कोर्ट ने मालेगांव धमाका केस में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जमानत दे दी थी .

मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि प्रज्ञा ठाकुर को जमानत के लिए पांच लाख रुपये के मुचलके, इसी रकम के दो बॉन्ड और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के पास अपना पासपोर्ट जमा कराया गया है ! उमा भर्ती के बाद हिंदुत्व ब्रांड क लिए  साध्वी  प्रज्ञा एक बड़ा नाम है !
सूत्रों का कहना है कि इस बारे में अभी अंतिम फैसला लिया जाना बाकी है। पार्टी की चिंता यह है कि क्या वह 'हिंदुत्व' के मुद्दे को इस ढंग से उठा पाएंगी, कि चुनाव आयोग भी इस पर ऐतराज न करे। यदि साध्वी को उम्मीदवार बनाया जाता है तो विपक्ष को यह कहने का मौका मिल जाएगा कि बीजेपी हिंदू असामाजिक तत्वों को बढ़ावा देती है। 

पुलिस बैंड की धुन पर वंदेमातरम् : शिवराज चौहान के आगे झुकी कमलनाथ सरकार?

राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद एक जनवरी को वंदेमातरम् का गायन नहीं हुआ था। इसे लेकर विवाद शुरू हो गया था। रोक लगने 24 घंटे बाद ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इसे कांग्रेस का शर्मनाक कदम बताया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मध्यप्रदेश को तुष्टिकरण का केंद्र बना रही है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल से पूछा था कि क्या वंदेमातरम् पर रोक का फैसला आपका है? शिवराज ने CM कमलनाथ से पूछे था , ''किसे खुश करना चाहते हैं'' ?


बैन के बावजूद शिवराज जी ने कहा था की उनके सभी विधायक 7 जनवरी को सचिवालय में गाएंगे वंदे मातरम ! इसके बाद कमलनाथ ने बुधवार को कहा था कि वंदेमातरम अब बड़े पैमाने पर होगा। शाह के बयान पर उन्होंने कहा था- ‘आजादी की लड़ाई के दौरान वंदेमातरम् गीत का अर्थ था, भारत मां को ब्रिटिश हुकूमत की गुलामी से मुक्त कराना। उन्होंने कहा था कि आजादी के बाद भारत मां की वंदना का अर्थ है, किसानों की खुशियां, जो मैं कर्जमाफी और फसलों के दाम सुनिश्चित करके कर रहा हूं। सही अर्थों में मप्र की वंदना में लगा हूं। वंदेमातरम् कर रहा हूं।'