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शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019

सरस्वती पूजा कल तैयारी अंतिम चरण में



विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा के पर्व बसंत पंचमी में गिनती के दिन ही शेष रह गए हैं। इसको लेकर शहर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस क्रम में कारीगर भी रात-दिन एक कर मां सरस्वती की प्रतिमाओं को तैयार करने में जुटे हुए हैं। जिले में कई स्थानों पर पंडाल सजाकर प्रतिमाओं को स्थापित कर विधिवत पूजन अर्चन किया जाता है।

इन सामग्री से करें पूजन

मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए विधि-विधान से पूजन करें। पूजा के दौरान कलश, पान, सुपाड़ी, लौंग, इलायची, शृंगार सामग्री, सफेद व पीला वस्त्र, पीला सरसों फूल, आम का मंजर, अक्षत, पल्लव, चंदन, हल्दी, अबीर, घी, सफेद फूल आदि से प्रतिमा स्थापित करें। मां को बैर, गाजर, मिसरीकन, सफेद मिठाई, बतासे आदि का भोग लगाएं। दूध, घी, दही, मधु, शक्कर से पंचामृत बनाकर चढ़ाएं।

बुधवार, 24 जनवरी 2018

भीष्म अष्टमी 2018: भीष्म पितामह के लिए किया जाता है व्रत, जानें क्या है इस दिन का महत्व



हिंदू पंचाग के अनुसार माघ माह की शुक्ल पक्ष अष्टमी को भीमाष्टमी के रुप में मनाया जाता है। इस दिन महाभारत के मुख्य किरदार भीष्म पितामाह ने अपने शरीर को छोड़ा था, इसी कारण से इस दिन को निर्वाण दिवस के रुप में मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन विधि के अनुसार व्रत किया जाता है। व्रत करने वाली महिला को बलशाली पुत्र की प्राप्ति होती है। इसी के साथ व्रत करने वाले श्रद्धालु को भीष्म पितामह की आत्मा को सुकून देने के लिए इस दिन तर्पण करना चाहिए।

मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि भीष्म अष्टमी का व्रत करने वाले के जाने-अनजाने में किए हुए पाप नष्ट हो जाते हैं और साथ ही पितृदोष से मुक्ति और पितरों को शांति मिलती है। महाभारत की कथा के अनुसार मान्यता है कि इस दिन अपनी इच्छा से इस दिन शरीर त्याग किया था। भीष्म पितामह के निमित्त जो श्रद्धालु तिल, जल के साथ श्राद्ध, तर्पण करता है और जरुरतमंद लोगों को दान करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

गुरुवार, 12 अक्तूबर 2017

अहोई अष्टमी: संतान की लंबी आयु के लिए आज इस मुहूर्त में करें पूजा



आज अहोई अष्टमी का व्रत है, जो कि व्रत करवा चौथ के चार दिन बाद और दिवाली के 7 दिन पहले मनाया जाता है। यह व्रत मां अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखती हैं।
इस व्रत के दौरान अहोई माता के चित्र के साथ साही के बच्चों के चित्र बनाकर उनका पूजन किया जाता है। जिन स्त्रियों को ये व्रत करना होता है, वे दिनभर उपवास रखती हैं।सूर्यास्त होने के बाद अहोई माता की पूजा प्रारंभ होती है। पूजन से पहले जमीन को साफ करते है साथ ही पूजा का चौक तैयार करें। फिर एक लोटे में जलकर उसे कलश की भांति चौकी के एक कोने पर रखें और भक्ति भाव से पूजा करें।इस बार अहोई अष्टमी 12 अक्टूबर को है और पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 17.50 पर है। इसमें एक खास बात यह भी है कि पूजा के लिए माताएं चांदी की एक अहोई भी बनाती हैं। फिर अहोई की रोली, चावल, दूध व भात से पूजा करें।

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