चीन के मुसलमानों के दुख से इमरान ख़ान अनजान ?

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चीन में बहुत से मुसलमानों का ब्रेशवॉश करके उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादार बनाने की कोशिश हो रही है. क्या मुसलमान अपने धार्मिक विचारों को छोड़कर कम्युनिस्ट रास्ते पर चलेंगे, चीन के पश्चिमी इलाके में खास शिविर चल रहे हैं जिनमें रखे गए लोगों को अपने धार्मिक विचार त्यागकर चीनी नीति और तौर तरीकों का पाठ पढाया जा रहा है. यहां लोगों को न सिर्फ खुद की और अपने परिजनों की आलोचना करनी होती है बल्कि चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का शुक्रिया भी अदा करना होता है.पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान चीन के मुसलमानों की स्थिति के बारे में कुछ नहीं जानते. उनके सामने जब कभी भी वीगर मुसलमानों की स्थिति का ज़िक्र होता है वे खुद को इस मामले से अनजान बता देते हैं.'


2017 के मध्य से चीन के शिनचियांग प्रांत में अधिकारी हजारों और संभवतः लाखों मुस्लिम चीनियों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश में लगे हैं. कई बार इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल होते हैं. एक अमेरिकी आयोग ने इसे आज की दुनिया में "अल्पसंख्यक लोगों का सबसे बड़ा कैदखाना" बताया.इमरान ख़ान ने और भी कई मुद्दों पर बात की और कहा कि "बीते 20 सालों में ये वो दौर है जब पाकिस्तान की विदेश नीति सरकार के हाथों में है."

आर्थिक मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है कि हमें इसके बाद अब और कभी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास जाना नहीं होगा. उन्होंने चीन के निवेश की बात की और कहा कि पाकिस्तान के लिए ये बेहद अहम है.

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