शरद पूर्णिमा पर घर में क्लेश न करें, तुलसी के पास दीपक जलाएं और रात में करें लक्ष्मी पूजा

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शरद पूर्णिमा के संबंध में मान्यता है कि रात में देवी लक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमण करती हैं और भक्तों से पूछती हैं कौन जाग रहा है, इसीलिए इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं।
देवी लक्ष्मी, भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा के लिए ये तिथि बहुत खास है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा भी की जाती है।
पूजा-पाठ की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने की वजह से इस दिन घर में प्रेम से रहना चाहिए। वाद-विवाद न करें। जिन घरों में क्लेश होता है, वहां देवी-देवताओं की कृपा नहीं होती है। पूजा-पाठ का फल पाना चाहते हैं तो घर में शांति बनाए रखें।
पूर्णिमा पर सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। ध्यान रखें रात में तुलसी को स्पर्श नहीं करना चाहिए।
मान्यता है कि द्वापर युग में इस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों संग रास रचाया था। वृंदावन के निधिवन के संबंध में कहा जाता है कि आज भी यहां श्रीकृष्ण और गोपियां रास रचाती हैं।
इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा करें। शिवलिंग पर चांदी के लोटे से दूध चढ़ाएं और दीपक जलाकर ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें। इसके लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करना चाहिए।
अगर आप हनुमानजी के भक्त हैं तो शरद पूर्णिमा पर उनकी मूर्ति के सामने दीपक जलाकर सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करें। भगवान को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं।
किसी गरीब व्यक्ति को कंबल और ऊनी वस्त्रों का दान करें। अपने सामर्थ्य के अनुसार दान का दान करें। भोजन कराएं।

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