प्रिय पाठकों,
आज मैं आपको स्वतंत्रता संग्राम में प्रेस की भूमिका याद दिलाना चाहता हूँ। ब्रिटिश शासन के खिलाफ हमारी लड़ाई में प्रेस की स्वतंत्रता अत्यंत महत्वपूर्ण थी। यह राजनीतिक विचारों को फैलाने का एक शक्तिशाली माध्यम था, इसलिए कई स्वतंत्रता सेनानियों ने समाचार-पत्रों से जुड़ना चुना।
वर्ष 1824 में राजा राममोहन राय ने प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने वाले प्रस्ताव का विरोध किया था। 1870 से 1918 तक के राष्ट्रवादी आंदोलन के शुरुआती दौर में मुख्य रूप से राजनीतिक प्रचार, जन-शिक्षा, राष्ट्रवादी विचारधारा का निर्माण और प्रसार, जनमत का प्रशिक्षण, संगठन और मजबूती पर जोर दिया गया। इन वर्षों में कई निर्भीक और प्रतिष्ठित पत्रकारों के नेतृत्व में अनेक समाचार-पत्र निकले। इन अखबारों में सरकार के कानूनों और नीतियों की गहराई से समीक्षा होती थी। वे सरकार के विरुद्ध एक विपक्षी संस्था की तरह काम करते थे।
हमारी वेबसाइट का उद्देश्य सरकारी क्षेत्र से जुड़ी उपयोगी जानकारी विभिन्न वर्गों तक पहुँचाना है। हम ऐसी रचनात्मक और लाभकारी खबरें प्रकाशित करते हैं जो जागरूकता बढ़ाएँ। हमारा प्रयास उन ताज़ा और अनछुए समाचारों व विचारों को सामने लाना है जो प्रासंगिक हैं, लेकिन अभी तक पर्याप्त रूप से कवर नहीं हुए हैं। विचारपूर्ण विश्लेषण और निर्भीक दृष्टिकोण हमारा मूल मंत्र है।
हम भारत और विश्व की खबरें कवर करते हैं तथा बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप निष्पक्ष दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। भारतीय नौकरशाही और राजनीति पर हमने अपनी कवरेज को विशेष रूप से मजबूत किया है। मुख्यधारा के मीडिया द्वारा नहीं उठाई गई ताज़ा कहानियाँ यहाँ जगह पाती हैं। हम सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और कॉर्पोरेट जगत की गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखते हैं।
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सादर,
बिपिन शशि
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