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बुधवार, 24 जनवरी 2018

भीष्म अष्टमी 2018: भीष्म पितामह के लिए किया जाता है व्रत, जानें क्या है इस दिन का महत्व



हिंदू पंचाग के अनुसार माघ माह की शुक्ल पक्ष अष्टमी को भीमाष्टमी के रुप में मनाया जाता है। इस दिन महाभारत के मुख्य किरदार भीष्म पितामाह ने अपने शरीर को छोड़ा था, इसी कारण से इस दिन को निर्वाण दिवस के रुप में मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन विधि के अनुसार व्रत किया जाता है। व्रत करने वाली महिला को बलशाली पुत्र की प्राप्ति होती है। इसी के साथ व्रत करने वाले श्रद्धालु को भीष्म पितामह की आत्मा को सुकून देने के लिए इस दिन तर्पण करना चाहिए।

मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि भीष्म अष्टमी का व्रत करने वाले के जाने-अनजाने में किए हुए पाप नष्ट हो जाते हैं और साथ ही पितृदोष से मुक्ति और पितरों को शांति मिलती है। महाभारत की कथा के अनुसार मान्यता है कि इस दिन अपनी इच्छा से इस दिन शरीर त्याग किया था। भीष्म पितामह के निमित्त जो श्रद्धालु तिल, जल के साथ श्राद्ध, तर्पण करता है और जरुरतमंद लोगों को दान करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

बुधवार, 13 सितंबर 2017

महालक्ष्मी व्रत आज: इन 5 उपायों को करने से दूर होगी दरिद्रता, पूरी होगी हर मनोकामना 

आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को महालक्ष्मी का व्रत किया जाता है। इस बार ये व्रत 13 सितंबर यानि बुधवार को है। 16 दिनों तक चलने वाला यह महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद के शुक्लपक्ष की अष्टमी को प्रारम्भ होता है और आश्विन मास कृष्णपक्ष की अष्टमी की तिथि तक चलता है। इस व्रत को करने से मां लक्ष्मी सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती है।महालक्ष्मी व्रत में मां लक्ष्मी के हाथी पर बैठी हुई मूर्ति को लाल कपड़ा के साथ विधि-विधान के साथ इनकी स्थापना करें और पूजा कर ध्यान लगाएं।

महालक्ष्मी व्रत के दिन श्रीयंत्र या महालक्ष्मी यंत्र को मां लक्ष्मी के सामने स्थापित करें और इसकी पूजा करें। यह चमत्कारी यंत्र धन वृद्धि के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। इस यंत्र की पूजा से परेशानियां और दरिद्रता दूर होती है।

महालक्ष्मी व्रत में दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल और दूध डालकर देवी लक्ष्मी की मूर्ति से अभिषेक करना चाहिए इससे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

माता लक्ष्मी को कमल का फूल बहुत पसंद होता है इसलिए लक्ष्मीजी की पूजा में यह फूल अवश्य चढ़ाना चाहिए।

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